Thursday, February 3, 2011

धान की पराली से बनाई जाएगी प्लाई

फतेहाबाद. धान निकालने के बाद बचे अवशेष व पराली को अब जलाने की जरूरत नहीं होगी, बल्कि कृषि विभाग द्वारा इस पराली को उपयोग में लाए जाने की योजना तैयार की जा रही है। विभाग द्वारा इसके तहत वुडन फैक्ट्री से संपर्क किया गया है, जिससे वे किसानों की पराली को खरीद सके। इससे पहले केवल धान के छिलकों का उपयोग वुडल प्लाई व वुडन बोर्ड के लिए किया जाता रहा है। यदि वुडन फैक्ट्री में पराली को काटकर इसे उपयोग में लाने की कोशिश कारगर होती है तो किसानों को दोहरा लाभ होगा। पराली की बिक्री होने से उन्हें जहां उसकी कीमत मिलेेगी, वहीं पराली में आग न लगाने से पर्यावरण भी सुरक्षित रहेगा। अब तक किसानों द्वारा धान निकालने के बाद पराली व अन्य अवशेष में आग लगा दी जाती थी। इसके कारण पर्यावरण का काफी प्रदूषण होता था और आग के कारण भूमि की उपजाऊ शक्ति भी कम हो रही थी। कृषि विभाग ने किसानों को इससे निजात दिलाने के लिए वुडन फैक्ट्री से संपर्क किया है, ताकि वो पराली के टूकड़े करके उसे उपयोग में ले सके। कृषि विभाग के अधिकारियों की माने तो इस बार वुडन फैक्ट्री में कुछ ट्रालियां पराली पहुंचाकर उसे उपयोग में लाने का प्रयास किया जाएगा। अगर विभाग की यह योजना कारगर साबित होती है तो किसानों को धान का मूल्य तो मिलेगा ही, उसके बाद पराली के दाम भी उसे मिलेंगे।

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