फतेहाबाद. विवाद शब्द तो जैसे सिविल अस्पताल प्रशासन के साथ जुड़ सा गया है। प्रशासन की लापरवाही पूर्ण रवैये व असंवेदनशीलता के कारण पिछले एक माह से अस्पताल प्रशासन लगातार विवादों में घिरा चला आ रहा है। दो दिन पूर्व जहां मरीज को अस्पताल परिसर से बाहर निकालने व एमरजेंसी में पत्रकारों के प्रवेश पर रोक लगाने को लेकर काफी विवाद हुआ था, आज भी ताजा घटनाक्रम में अस्पताल प्रशासन उस समय विवादों में घिर गया, जब दुर्घटनाग्रस्त युवक को करीब बीस मिनट तक एमरजेंसी वार्ड में भर्ती नहीं किया गया और उसने तडफ़ते हुए दम तोड़ दिया। इसके बाद मृतक के परिजनों में रोष फैल गया। मिली जानकारी के अनुसार आज सुबह करीब नौ बजे डेरा कैंटिन के पास सिरसा की तरफ से आ रहे रतिया के गांव महमदकी निवासी पप्पु की मोटरसाइकिल को अज्ञात वाहन ने टक्कर मार दी, जिसके कारण वह गंभीर रूप से घायल हो गया। मौके पर उपस्थित लोगों ने इसकी सूचना तुरंत हाइवे पुलिस को दी। सूचना मिलने पर हाइवे पुलिस घटनास्थल पर पहुंच गई और युवक को सिविल अस्पताल में ले आई। अमरजैंसी वार्ड के सामने पहुंचकर पुलिस ने इसकी सूचना वार्ड के स्वास्थ्यकर्मियों को दी। बताया जाता है कि करीब २० मिनट तक युवक गाड़ी में तड़पता रहा और कोई भी स्वास्थ्यकर्मी वहां नहीं पहुंचा। आखिरकार पुलिस कर्मचारियों ने घायल को स्ट्रेचर पर लेटाकर एमरजेंसी में पहुंचाया, जहां युवक ने तड़पते हुए दम तोड़ दिया। इस बारे में जब डॉ.एनके गोयल से बात की गई तो उन्होंने कहा कि जिस वक्त उक्त केस अस्पताल में आया था, तब स्वास्थ्य कर्मी एक अन्य एमरजेंसी केस में लगे हुए थे। पता चलने पर वे तुरंत मौके पर पहुंचे और उसे एमरजेंसी वार्ड में लाकर उसका इलाज शुरू कर दिया। उधर दूसरी ओर एसएमओ का कहना है कि अगर स्वास्थ्य कर्मी उपलब्ध नहीं था तो पुलिस कर्मी भी घायल को एमरजेंसी वार्ड में ला सकते थे। बहरहाल लापरवाही सिविल अस्पताल प्रशासन की रही हो या पुलिस की, परंतु खामियाजा एक व्यक्ति को अपनी जान देकर भुगतना पड़ा।
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