चंडीगढ़. हिसार में आरक्षण की मांग को लेकर जाटों द्वारा उपद्रव मचाकर सरकारी संपत्ति को नष्ट करने के मामले में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने हरियाणा पुलिस द्वारा ढिलाई बरतने के लिए राज्य सरकार को आड़े हाथों लिया है। इस संबंध में सरकार की ओर से सोमवार को दिए हलफनामे पर जस्टिस एमएम कुमार और जस्टिस टीपीएस मान की खंडपीठ ने राज्य सरकार से कहा कि इस मामले में अभी तक आरोपियों पर की गई कार्रवाई की रिपोर्ट दें। कोर्ट ने सरकार को फटकार लगाते हुए यह भी कहा कि इस मामले में आरोपियों की गिरफ्तारी किए बिना ही अदालत में चालान कैसे पेश कर दिए गए। खंडपीठ ने यह निर्देश हरियाणा सरकार की ओर से दायर उस हलफनामे के बाद जारी किए जिसमें पुलिस ने अभी तक की कार्रवाई की जानकारी दी। द एंटी करप्शन फेडरेशन आफ इंडिया की ओर से दायर याचिका पर हरियाणा सरकार की ओर से ज्वांइट सेक्रेटरी वीपी वत्स ने अदालत को बताया कि पुलिस ने हिसार जिले के अलग-अलग थानों में कुल 39 मामले दर्ज किए हैं।
इनमें सरकारी संपत्ति को नष्ट करना और आर्म्स एक्ट के मामले शामिल हैं। कुछ मामले रेलवे पुलिस के पास भी दर्ज हैं। इन 39 मामलों में से 23 मामलों में पुलिस ने अदालत में चालान पेश कर दिए हैं जबकि अन्य 13 मामलों में अभी जांच जारी है। उन्होंने बताया कि पुलिस ने हिसार के एसपी के खिलाफ भी 13 सितंबर 2010 को धारा 302 के तहत हत्या का मामला दर्ज किया था। क्राइम ब्रांच के अनुसार, 65 गवाहों की गवाहियां रिकार्ड की जा चुकी हैं। वहीं तकनीकी सहयोग के लिए मधुबन स्थित फोरेंसिक लैबोरेटरी और साइबर सेल की मदद भी ली जा रही है। खंडपीठ सरकार के इन कदमों से आश्वस्त नहीं हुई और अदालत ने सरकार से अब तक की गई पूरी कार्रवाई की विस्तृत जानकारी मांगी है।
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