फतेहाबाद/विकास मैहता. केंद्र में आरक्षण की मांग को लेकर मेहुवाला में रेल ट्रैकों पर धरने पर बैठे अनशनकारी विजय सिंह की मौत के बाद क्षेत्र में स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई। आंदोलनकारियों में प्रशासन के प्रति तीव्र रोष है। आज मेहुवाला पहुंचे जाट आरक्षण समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष यशपाल मलिक ने प्रशासन को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि विजय सिंह कड़वासरा की मौत के पीछे प्रशासन की लापरवाही पूर्ण रवैया है। उन्होंने कहा कि जब तक सरकार मृतक को शहीद का दर्जा, उसके नाम का स्मारक व मृतक के परिजनों को वह तमाम सुविधाएं नहीं देती, जो मैय्यड़ हिंसा के दौरान सुनील श्योराण के परिजनों को दी थी। तब तक वह शव का दाह संस्कार नहीं करेंगे और इसी तरह ट्रैक पर डटे रहेंगे। हाईकोर्ट द्वारा सरकार को रेलवे ट्रैक खाली कराने बारे दिए गए निर्देशों पर अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति के अध्यक्ष यशपाल मलिक ने कहा कि इस बारे में उन्हें कोई जानकारी नहीं है और न ही वे इस मामले में पार्टी हैं। कोर्ट ने सरकार को क्या निर्देश दिए हैं, उनकी जानकारी उन्हें नहीं है। उन्होंने सरकार को चेताया कि यदि सरकार अनशन कारियों को जबरन रेलवे ट्रैक से हटाने का प्रयास करती है तो उसके निकलने वाले परिणामों की सरकार स्वयं जिम्मेवार होगी। श्री मलिक ने कहा कि 6 माह पूर्व मैय्यड़ में हुई हिंसा सरकार द्वारा बल प्रयोग करने का ही नतीजा थी। उन्होंने प्रशासन के प्रति रोष व्यक्त करते हुए कहा कि विजय की मौत को 18 घंटे बीत चुके हैं, लेकिन अभी तक प्रशासन का कोई भी अधिकारी मौके पर पहुंचा है। उल्लेखनीय है कि मेहुवाला में रेलवे ट्रैक पर अपनी मांगों को लेकर जाट समुदाय के लोगों ने पिछले एक पखवाड़े से भूख हड़ताल कर रखी थी, इस दौरान बीती रात एक अनशनकारी 63 वर्षीय विजय कड़वासरा की मौत हो गई थी। जिसके बाद क्षेत्र में स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है। प्रशासन ने किसी भी अप्रिय घटना से निपटने के लिए तमाम बंदोबस्त किए हैं। धरनास्थल के 200 मीटर के दायरे को सुरक्षा कर्मियों ने घेर रखा है और बताया जाता है कि केंद्र कीतरफ से भी अर्धसैनिक बल की दो कंपनिया जिला मुख्यालय पर पहुंच चुकी हैं। धरने पर आज जाट आरक्षण संघर्ष समिति के प्रदेशाध्यक्ष हवा सिंह सांगवान, जाट महासभा के प्रदेशाध्यक्ष ओमप्रकाश मान, संघर्ष समिति के राष्ट्रीय महासचिव सूबे सिंह ढाका, प्रदेश सचिव लक्ष्मीनारायण देहडू़, प्रदेश महासचिव महेंद्र सिंह पूनिया सहित हजारों आंदोलनकारी मौजूद थे।
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