अजय मेहता
फतेहाबाद. फतेहाबाद, रतिया और टोहाना में तोडफ़ोड़ और सरकारी संपंति को नुकसान पहुंचाने वाले तथा दहशत फैलाने के आरोपियों के खिलाफ जिला पुलिस द्वारा आतंकवाद निरोधक अधिनियम के तहत कार्रवाई की जा सकती है। हालांकि इस प्रकरण में अब तक किसी गिरफ्तारी नहीं हुई है और पुलिस द्वारा नामलूम लोगों को नामजद किया गया है। सूत्रों की मानें तो प्रशासन कठोर कदम उठाते हुए आगजनी करने वाले आसामाजिक तत्वों के खिलाफ दर्ज किए मामले को अब आतंकवादी निरोधक अधिनियम में बदल सकता है। इसके तहत आजीवन कारावास, जुर्माना औँर मृत्युदंड तक का प्रावधान है। लेकिन आरोपियों को मृत्युदंड उस स्थिति में दिया जा सकता है जब घटना के दौरान जानमाल का नुकसान हुआ हो। इस अधिनियम के तहत आरोपियों को अपनी जमानत के लिए भी कम से कम डेढ़ साल तक का भी इंतजार करना पड़ सकता है। ऐसे मामलों की सुनवाई न तो सिविल कोर्ट करता है और डीएम कोर्ट में होती है। इसके लिए केंद्र सरकार द्वारा स्थापित तीन सदस्यीय ट्रिब्यूनल करती है जिसका चेयरमेन हाईकोर्ट का सिटिंग जज होता है। सिलसिलेवार हुई आगजनी की घटनाओं को अंजाम देकर सरकारी संपंति को नुकसान पहुंचने व लोगों में दहशत फैलाने वालों के खिलाफ प्रशासन सख्त कार्रवाई करने के मूड़ में नजर आ रहा है। कानूनविदों की मानें तो भारतीय दंड संहिता की धारा १४८, १४९, ४५२, ४३६, १६/२०, अन-लॉ-फुल, एक्टीविटीज प्रिवेंशन एक्ट ३७ ऑफ १९६७ अवेडमेंट २००८ में आतंकवादी गतिविधियों को रोकने का प्रावधान है। पुलिस कप्तान जेएस लांबा ने बताया कि 28 फरवरी को हुई आगजनी व सरकारी संपति को नुकसान पहुंचाने की कार्रवाई करने वालों के खिलाफ सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने, आगजनी करने व दहशत फैलाने का मामला दर्ज किया गया था। लेकिन अब उच्चाधिकारियों के निर्देशानुसार आरोपियों के खिलाफ आतंकवाद निरोधक अधिनियम भी जोड़ दिया गया है।
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