Friday, January 29, 2010

प्रभु का नाम हमारी अंतर्रात्मा तक शांति प्रदान करता है: प्राणवल्लभ जी महाराज

फतेहाबाद. जगद्गुरू श्री मद्वल्लभाचार्य जी के वंशावंश गोस्वामी श्री प्राणवल्लभ जी महाराज एवं गोस्वामी बृजवल्लभ जी मथुरा से आज श्री रघुनाथ मंदिर में पधारे। इस अवसर पर प्रवचन करते हुए उन्होंने कहा कि वर्तमान युग में भी लोग धर्म के प्रति आसक्त हैं। धार्मिक प्रवृत्ति उनके संग के द्वारा, कीर्तन के द्वारा, सेवा के द्वारा सभी अपने-अपने धर्म का पालन करते हैं। जीवन बहुत ही छोटी वस्तु का नाम है। इच्छाएं सीमाहीन होती है, जिसका कोई अर्थ नहीं होता। हमारे संकुश जीवन में हमारी इच्छाओं को लौकिक सांसारिक कार्य से हटाकर भगवत नाम, भगवत कीर्तन एवं भगवत सेवा में लगाएं। यही प्रत्येक मनुष्य के जीवन का सर्वोपरि लक्ष्य होना चाहिए। जिस प्रकार हवा का झोका आता, हमको ठठक पहुंचा कर चला जाता है। ये प्रभु का नाम हमारी अंतर्रात्मा तक शांति प्रदान करता है। जिससे मन और बुद्धि सुचारू रूप से कार्य करती है एवं आग्रता मिलती है, एवं सम्मान मिलता है। यह सारी चीजें जब मनुष्य के जीवन में आ जाती हैं तो उसे पैसे के पीछे दौड़ लगाने की आवश्यकता नहीं रहती। लक्ष्मी उसके पास चल कर आ जाती है। इतिहास गवाह है कि जहां पर भगवान है, वहीं लक्ष्मी है, जहां भगवान नहीं वहां लक्ष्मी भी नहीं है।

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