फतेहाबाद। पार्टी की मजबूती व स्थिरता ही उनका उद्देश्य है, इसीलिए ऐलनाबाद उपचुनाव न लडऩे का फैसला लिया है। इस स्थिति में कार्यकर्ता अपने विवेक से किसी भी पार्टी को वोट डाल सकते हैं। इसके लिए वे स्वतंत्र है। यह बात हरियाणा जनहित कांग्रेस के सुप्रीमों कुलदीप बिश्नोई ने एक पत्रकार वार्ता में कही। वे आज यहां श्री राम सेवा समिति धर्मशाला में कार्यकर्ताओं की बैठक को संबोधित करने के बाद पूर्व जिलाध्यक्ष राजेंद्र चौधरी काका के निवास पर पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे। हजकां सुप्रीमों ने कहा कि बिजली व्यवस्था को लेकर प्रदेश सरकार के दावे पूरी तरह से खोखले साबित हो रहे हैं। मुख्यमंत्री हुड्डा के गृहक्षेत्र व उनके गांव मेंं आए दिन बिजली को लेकर लगने वाले जाम इसका जीता जागता प्रमाण है। इसके विपरीत मुख्यमंत्री कहते हैं कि आने वाले दो सालों में प्रदेश के पास सरपल्स बिजली होगी। कुलदीप बिश्नोई ने मुख्यमंत्री द्वारा गुडग़ांव व पानीपत की बिजली व्यवस्था ठेके पर देने का विरोध करते हुए कहा कि इस तरह की व्यवस्थाएं देश में जहां भी हुई है, वहंा नकारात्मक परिणाम निकले हैं। उन्होंने कहा कि पानीपत व गुडग़ांव प्रदेश के इंडस्ट्रियल हब है, जहां बिजली व्यवस्था निजी हाथों में सौंपकर पूंजीपतियों के हाथों में खेलने का काम कर रही है। विधानसभा चुनाव के बाद हजकां छोड़कर कांग्रेस में शामिल होने वाले विधायकों के बारे में पूछे गए सवाल के बारे में उन्होंने कहा कि उन्हें ऐसा करके संविधान के विरुद्ध कार्य किया है, जिसका खामियाजा वे जल्द भुगतेंगे। कुलदीप बिश्नोई ने कहा कि गठबंधन की राजनीति से उन्हें काफी नुकसान हुआ है और वे भविष्य में गठबंधन के बारे में सोचेंगे भी नहीं। उन्होंने कहा कि वे हमेशा अपने सिद्धांतो पर अडिग रहे हैं, उन्हें चुनाव के बाद मुख्यमंत्री जैसे पद का लालच भी दिया गया, लेकिन उन्होंने अपनी पार्टी व कार्यकर्ताओं की नजरों में गिरना नहीं चाहते थे, इसलिए उन्होंने यह पद भी ठुकरा दिया और अपने सिद्धांतों से समझौता नहीं किया। इस अवसर पर हजकां जिलाध्यक्ष निहाल सिंह मताना, पूर्व जिलाध्यक्ष राजेंद्र काका चौधरी, कुलवंत बराड़, सुभाष खिलेरी, मंगतराम लालवास, इंद्रजीत पूनिया, देवीलाल बिश्नोई, रामनिवास गुज्जर, कामरेड रामेश्वर बिश्नोई, नरेश डेलू, ओमप्रकाश मोगा, वीरभान मेहता, बंसत रूखाया, सुभाष रायल, राजेंद्र खिलेरी, सुरेश काकड़ अनेक कार्यकर्ता मौजूद थे।
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