Wednesday, December 23, 2009

ऐलनाबाद उपचुनाव कांग्रेस के लिए चुनौती!

अजय मेहता
फतेहाबाद. विधानसभा सीट का उपचुनाव कांग्रेस के लिए एक ऐसी चुनौती बनकर आने वाला है जिसमें कांग्रेस की विफलता वर्तमान हरियाणा सरकार के लिए बड़ा सिरदर्द बन सकती है। राज्य की हुड्डा सरकार की मुसीबत तो इस कदर बढ़़ जाएगी जिससे निबटना मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के लिए आसान नहीं होगा। गौरतलब है कि इंडियन नेशनल लोकदल के अध्यक्ष ओम प्रकाश चौटाला, जो विधानसभा चुनावों के दौरान दो जगह से चुनाव जीते थे, के इस्तीफे के बाद ऐलनाबाद सीट खाली हो गई है, अब यह उपचुनाव 20 जनवरी को होने जा रहा है। चौटाला के बेटे अभय का इस उपचुनाव में इनेलो से उम्मीदवार बनना तय है। यह इलाका चौटाला परिवार का गढ़ है। इस सीट को किसी भी कीमत पर जीतने के लिए अभय ने गांव-गांव घर घर जनसंपर्क तेज कर रखा है। वहीं कांग्रेस ने अभी तक यहां कोई उम्मीदवार तय नहीं किया है। कांग्रेस के ज्यादातर नेता इस सीट पर पार्टी की हार तय मानकर पहले से ही ठंडा रुख अपनाए हुए हैं जबकि मुख्यमंत्री हुड्डा इस उपचुनाव के नतीजों ऐलनाबाद उपचुनाव का राजनीतिक अर्थ समझ रहे हैं और वह चाहते हैं कि यहां पार्टी इस तैयारी के साथ मैदान में उतरे कि अगर चुनाव जीता न जा सके तो कम से कम चौटाला परिवार को कड़ी टक्कर देकर इनेलो की बढ़़त को कम से कम किया जा सके, क्योंकि अगर यह उपचुनाव इनेलो ने पहले से भी ज्यादा वोटों से जीता तो ओमप्रकाश चौटाला और उनके समर्थकों का हौसला इस कदर बढ़ जाएगा कि हुड्डा सरकार को विधानसभा के भीतर से लेकर बाहर तक हर कदम पर कड़े विरोध का सामना करना पड़ेगा। इसी के चलते मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा पूर्व में ऐलनाबाद में एक रैली भी कर चुके हंै। हालांकि यह रैली क्षेत्र में अपना कोई विशेष प्रभाव तो नहीं छोड़ पाई, उलटे कई सवाल जरूर छोड़ गई। मुख्यमंत्री द्वारा स्थानीय नेताओं परकी गई टिप्पणी भी जिला सिरसा के नेताओं को कटघरे में खड़े किए हुए है। सिरसा में कांग्रेस की फूट किसी से छुपी नहीं है, जो ऐलनाबाद उपचुनाव में सिरदर्द बन सकती है। सीएम द्वारा रैली में विकास कार्यों की की गई घोषणा भी अब शायद ही सिरे चढ़ पाए, क्योंकि 26 दिसंबर से आचार संहिता लागू हो जाएगी। अगर ये विकास कार्य पहले शुरू हो जाते हैं तो शायद इसका सीधा फायदा कांग्रेस को मिल सकता था। सूत्रों की मानें तो इनेलो प्रमुख की रणनीति अभय की बढ़़त अपने पिता से भी ज्यादा करवाकर ऐलनाबाद में जीत दर्ज करवाने की है। इसके बाद कांग्रेस में हुड्डा विरोधी मुख्यमंत्री बदलने की अपनी मुहिम तेज करेंगे तथा इनेलो कार्यकर्ता किसानों की समस्याओं और महंगाई के विरोध में सड़कों पर उतर कर सरकार की मुसीबत बढा सकते हैं।

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