रमेश जोइया
फतेहाबाद. देश की सुरक्षा के लिए एक बहुत बड़ा सवाल बने बिना आईएमईआई नंबर के मोबाइलों को भले ही केंद्र सरकार ने बंद कर दिया हो, परन्तु अपने स्वार्थ के लिए कुछ दुकानदार कथित तौर पर डुप्लीकेट आईएमईआई नंबर डालकर फिर से चालू कर रहे हैं। हालांकि केंद्र सरकार ने एक फिस तय कर इन मोबाइलों को चालू करने के लिए कुछ दुकानदारों को अधिकृत किया था, परन्तु स्वार्थवश कुछ अन्य दुकानदार तमाम नियमों व कानूनों को ताक पर रखकर बंद हुए मोबाइलों को फिर से शुरू करने के लिए निश्चित फीस लेकर तथा डुप्लीकेट आईएमईआई नंबर देकर फिर से शुरू करने का गौरखधंधा कर रहे हैं। ऐसे दुकानदार उपभोक्ता से न तो दस्तावेज लेते हैं और ना ही सही नंबर डालते हैं। इस प्रकार डाले गए चालू किए गए मोबाइल नंबर ना केवल सुरक्षा पर सवालिया निशान उठा रहे हैं, बल्कि कई लोगों को मुसीबत में भी डाल सकते हैं। अगर सारे मामले को गौर से समझे तो शहर के दुकानदार एक विशेष साफ्टवेयर 'स्पाइडरमैनÓ की मदद से बंद हुए मोबाइल फोन जिनका आईएमईआई नंबर रजिस्ट्रड नहीं था को अन्य मोबाइल आईएमईआई नंबर डालकर शुरू कर देते हैं। सूत्रों की माने तो ये दुकानदार मात्र 50 से 100 रुपए के लालच में बंद हुए मोबाइलों में अलग-अलग कंपनी के मोबाइलों से लिए गए आईएमईआई नंबरों को इन सैट में डालकर चला रहे हैं। इन नंबरों के कारण कई लोग लपेटे में आ सकते हैं। क्योंकि किसी एक व्यक्ति द्वारा किया गया गैर कानूनी कार्य उन सभी को फसाने के लिए काफी है, जिनका आईएमईआई नंबर एक जैसा है। हालांकि मोबाइल कंपनियों द्वारा उपभोक्ता को यूनिक आईएमईआई नंबर दिया जाता है, परन्तु इस विशेष साफ्टवेयर की मदद से दुकानदार एक नंबर कई मोबाइल सैट पर डाल देते हैं। हालांकि इस बारे में दुकानदार भी नहीं जानते की उन्होंने कौन सा आईएमईआई नंबर किस मोबाइल सैट में डाला है।
सरकार द्वारा बंद हुए मोबाइलों को चालू करने के लिए शहरों में अधिकृत सैंटर बनाए गए हैं, जहां निर्धारित फिस देकर व पहचान संबंधी दस्तावेज जमा करवाकर उपभोक्ता बंद हुए मोबाइलों को शुरू करवा सकता है।
No comments:
Post a Comment