Saturday, December 19, 2009

नियोजित ग्राम योजना बंद

रमेश जोइया
फतेहाबाद. राज्य सरकार द्वारा शुरु की गई महत्वाकांक्षी योजना 'नियोजित ग्राम योजनाÓ ने शुरु से पहले ही जहां दम तोड़ दिया, वहीं ग्रामवासियों को शहर जैसी सुविधाएं मिलने का सपना भी टूट गया है और प्लाट आवेदकों में निराशा छा गई है।
उल्लेखनीय है कि जिले के गांव बीघड़ मे हुडा की ओर से करीब 5 वर्ष पूर्व राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी योजना 'नियोजित ग्राम योजनाÓ शुरू की गई थी। तालमेल के अभाव और हुडा विभाग की लापरवाही के कारण दम तोड़ गई। इस योजना के तहत विभाग ने गांव बीघड़ की साढ़े 10 एकड़ भूूमि जिसमें खसरा नंबर 646 की साढ़े दस एकड़ भूमि कलेक्टर रेट पर उक्त भूमि ग्राम पंचायत से ली थी। इस संबंध में ग्राम पंचायत ने एक प्रस्ताव (संख्या नं. 2 दिनांक 27.6.2003) पारित कर अपनी सहमति दर्शाई थी। इस भूमि विभाग द्वारा विभिन्न साईज के 105 प्लाट काटे थे जिसमे एक कनाल, 14 मरले, 10 मरले, 8 मरले के प्लाट शामिल थे। इसके लिए विभाग ने बाकायदा प्रस्तावित भूमि पर सड़क बनाने सहित अन्य विकास कार्य भी करवाए थे और विभाग ने इन प्लाटों की बिकवाली के लिए आवेदन भी आंमत्रित किए थे। जिस पर गांव वासियों ने उत्साहपूर्वक प्लाट लेने के लिए आवेदन भी किए थे तथा विभाग द्वारा निश्चित की गई अग्रिम राशि क्रमश: 2, 3 और 5 हजार की राशि भी विभाग को जमा करवा दी थी। विभाग द्वारा ग्रामीण सैक्टर में कम्यूनिटी सैंटर तथा शांपिग सैंटर भी बनाना प्रस्तावित था तथा मनोरंजन के लिए पार्कों की व्यवस्था करने की बात भी कही गई थी। इस महत्वाकांक्षी योजना का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि तत्कालीन मुख्यमंत्री औमप्रकाश चौटाला और नगर एवं ग्राम आयोजन मंत्री धीरपाल सिंह ने 8 दिसंबर 2004 को योजना का शिलान्यास जोर शोर से किया था। शिलान्यास के बाद प्रस्तावित भूमि पर काटे गए प्लाटों के आंवटन के लिए आवेदन आमंत्रित किए गए थे और शीघ्र ही उन्हें आवंटित करने की बात कही गई थी। परंतु लंबे इंतजार के बाद आवेदकों को प्लाट तो नहीं मिले परंतु करीब 5 माह पूर्व से आवदेकों को उनकी अग्रिम राशि ब्याज सहित मिलनी शुरु हो गई है। इस योजना के दम तोडऩे के पीछे कहीं न कहीं विभागीय लापरवाही है। अगर सूत्रों की मानें तो पंचायत द्वारा भूमि को कलैक्टर रेट पर विभाग को दिए जाने की सहमति के बाद न तो विभाग ने कोई मुआवजा दिया और न ही कोई पत्राचार किया। मामले में सबसे बड़ी बात यह रही है कि विभाग ने जमीन का अधिग्रहण तो किया नहीं और मुख्यमंत्री से शिलान्यास करवा सैक्टर विकसित करने की कवायद शुरु कर दी। इस पर विभाग का लाखों रुपए खर्च भी हुए। लंबे समय तक फाइलों में अटका मामला आखिरकार दम तोड़ गया। इस बारे में जब हिसार मंडल के हुडा प्रशासक बलराज सिंह मोर से बात की गई तो उन्होंने बताया कि किन्हीं तकनीकी कारणों से यह योजना बंद कर दी गई है। इसके एवज में प्लॉट के आवेदकों से ली गई अग्रिम राशि को ब्याज सहित उन्हें लौटाया जा रहा है। उधर बीघड़ के सरपंच भूप सिंह का कहना है उक्त पंचायती जमीन पर ग्राम विकास के कार्य करवाए जाएंगे जिससे गांववासी लाभांवित हो सकें।

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