फतेहाबाद/रमेश जोइया. शहरों एवं ग्रामीण इलाकों के गुलाबी और पीले राशन कार्ड धारक गरीब लोगों को सस्ती दर पर गेहूं, चीनी और केरोसीन तेल आदि उपलब्ध करवाने के लिए खोले गए राशन डिपो अपने उद्देश्य पर खरे नहीं उतर रहे। शहर के सभी डिपो होल्डर सरकार द्वारा निर्धारित नियमों-कायदों की धज्जियां उड़ाते हुए अपनी मनमर्जी के अनुसार डिपो खोलते व बंद करते हैं। ऐसे हालात में गरीब उपभोक्ताओं को डिपो खुलने का इंतजार ही नहीं करना पड़ता बल्कि डिपो खुला है, यह देखने के लिए भी डिपो के बार-बार चक्कर काटने पड़ते हैं। राज्य सरकार ने गुलाबी व पीले कार्ड धारक गरीब लोगों को बेहद सस्ती दर पर गेहूं, चीनी व कैरोसिन तेल इत्यादि बिक्री करने की जिम्मेवारी सरकारी राशन डिपो को सौंप रखी है। बढ़ती महंगाई के इस दौर में जब गुलाबी व पीले कार्ड धारक गरीब लोग इन राशन डिपो की ओर रुख करते हैं तो उन्हें निराश होकर घर लौटना पड़ता है, क्योंकि तमाम डिपो अकसर बंद मिलते हैं। ये राशन डिपो होल्डर महीनाभर में केवल दो तीन दिन ही अपने डिपो खोलते हैं, लेकिन इसका भी कोई निश्चित दिन एवं समय नहीं है। ऐसा डिपो होल्डर जानबूझ कर और अपने फायदे के लिए करते हैं, क्योंकि दो-तीन ही डिपो पर राशन बिक्री करते हैं। इस दौरान जो उपभोक्ता राशन ले गया सो ले गया तथ बचा हुआ राशन डिपो होल्डर ब्लैक मार्केट में बेचकर बेजा कमाई करता है। ऐसी स्थिति किसी एक सरकारी राशन डिपो की नहीं बल्कि करीब-करीब सभी डिपो का हाल भी कमोबेश ऐसा ही है।
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