Tuesday, December 8, 2009

असुरक्षित है लधु सचिवालय

रणधीर मताना

फतेहाबाद। दूसरों को नसीहत, खुद की मियां फजीहत। कुछ ऐसा ही हो रहा है जिला प्रशासन के साथ, जहां शहर में आग से होने वाले खतरे से बचने के लिए सभी होटलों, धर्मशालाओं व स्कूलों को अग्नि शमन यंत्र रखने के प्रबंध करने के सख्त आदेश दिए गए हैं, लेकिन शहर की सबसे महत्त्वपूर्ण इमारतों में शुमार लघु सचिवालय भवन आग लगने पर किसी भी तरह से सुरक्षित नहीं है। इस विशाल इमारत में लगाए गए सभी अग्नि शमन यंत्रों का उचित प्रबंध न होने के कारण कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है और भीड़-भाड़ वाले लघु सचिवालय में डबवाली कांड जैसी घटना दोहराई जा सकती है। शायद जिला प्रशासन भी इसी बात का इंतजार कर रहा है तभी तो लघु सचिवालय में लगाए गए यंत्रों की तरफ किसी भी अधिकारी ने ध्यान नहीं दिया। अलबता अब जिला प्रशासन की तरफ से अब एक पत्र जारी किया गया है। इस पत्र के मुताबिक शहर में बनी धर्मशाला, होटल व स्कूल को अग्नि श्मन यंत्र रखने होंगे, ताकि किसी प्रकार की कोई दुर्घटना ना हो। इसके लिए डीसी ने सख्त आदेश भी दिए हैं कि यदि होटल, धर्मशाला व स्कूल संचालक समय पर अग्नि श्मन यंत्र नहीं लगवाए या वे सही नहीं पाए गए तो उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। लेकिन लघु सचिवालय में खराब पड़ी व्यवस्था के लिए कौन जिम्मेवार है और वह कब ठीक हालत में हो पाएगी। इसका शायद किसी के पास कोई जबाव नहीं है, अलबता इसकी देखरेख के लिए 2003 में बनाई गई कमेटी ने भी आज तक इस पर कोई ध्यान नहीं दिया। भले ही उस समय कमेटी में शामिल जिला फायर अधिकारी ने इस ईमारत को अग्नि श्मन यंत्रों की खराबी के कारण इसे असुरक्षित घोषित कर दिया था। लघु सचिवालय की विशाल ईमारत की तरफ गौर करें तो आग को बुझाने के लिए प्राथमिकता के तौर पर यहां अग्नि शमन यंत्रों के साथ-साथ स्मोक डिटक्टर, हीट डिटक्टर, आटोमेटिक सिस्टम कलर सहित तीन मंजिला इमारत में पानी पहुंचाने के लिए पाइपें भी लगाई गई है, लेकिन आग बुझाने के लिए लघु सचिवालय में कोई भी सिस्टम चालू नहीं है। सचिवालय की तीनों बिल्डिंगों में लगाए गए दो दर्जन से अधिक अग्नि शमन यंत्रों में से अधिकतर खराब हालत में है। इन अग्नि यंत्रों को वर्ष 2000 में लगाए गया था और इन्हें 2002 में दौबारा से भरा जाना था, लेकिन आज तक इन्हें किसी ने चैक नहीं किया। सचिवालय में लगे अग्नि शमन यंत्रों पर अभी भी भरने की तिथि 2000 व अंतिम तिथि 2002 लिखी हुई है। शायद ही ऐसा कोई यंत्र होगा जिसमें आग बुझाने लायक गैस हो। इनमें से काफी यंत्रों पर स्प्रींग नहीं है तो कुछ की पाइपें टूटी हुई है। इन यंत्रों के अलावा सुरक्षा के लिहाज से लगाए गए स्मोक डिटक्टर से शायद कभी अलार्म बजी हो। इस यंत्र से आग लगने के बाद उठने वाले धुएं से अलार्म बज उठता है, लेकिन देखभाल न होने के कारण वे खराब पड़े हैं। हीट सिस्टम भी खराब है जिसमें आग लगने से लगाया गया बल्ब अपने आप फूट जाता है और पाइपों से पानी निकल पड़ता है। इसके साथ ही उपरी मंजिलों पर पानी पहुंचाने के लिए लगाए गए पाइपें भी रख-रखाव के अभाव में टूटे हुए हैं। इस हालात में यदि किसी कारण से लघु सचिवालय की इमारत में कहीं भी आग लग जाती है तो उपर की बिल्डिंग में पानी कैसे पहुंचेगा, इसका जबाव किसी के पास नहीं है।

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