रमेश जोइया
फतेहाबाद. हाल ही में संपन्न हुए फतेहाबाद, रतिया(सु.) व टोहाना विधानसभा चुनाव के परिणामों पर यदि गौर करें तो यह लगता है कि डेरा प्रेमियों का राजनीति में जो दबदबा समझा जाता था, उसकी पूरी तरह से हवा निकल गई है। क्योंकि अपने आप चुनाव परिणामों को प्रभावित करने का दावा करने वाले डेरा प्रेमियों ने फतेहाबाद, रतिया हलकों में कांग्रेस प्रत्याशियों दुड़ा राम और जरनैल सिंह को खुला समर्थन करने की घोषणा की थी, लेकिन इन दोनों ही सीटों पर डेरा प्रेमियों द्वारा समर्थित प्रत्याशियों को पराजय का सामना करना पड़ा, जबकि टोहाना में डेरा प्रेमियों ने कांगे्रस प्रत्याशी परमवीर सिंह का विरोध किया था, वहां कांग्रेस प्रत्याशी को विजय हासिल हुई। इससे जहां डेरा प्रेमियों की एकजुटता को भारी धक्का लगा है, वहीं राजनीति में डेरा प्रेमियों का चला आ रहा दबदबा भी काफी कम हुआ है।
फतेहाबाद विधानसभा सीट का काफी कशमकश के बाद डेरा प्रेमियों ने कांग्रेस प्रत्याशी दूड़ाराम को बाकायदा स्थानीय संगत घर में बुलाकर और संगत के बीच में उनको खुला समर्थन देने की घोषणा की थी, लेकिन डेरा प्रेमियों की इस घोषणा के बाद से ही डेरा के कुछ प्रेमियों ने बाकायदा अखबारों में बयान देकर यह कहना शुरू कर दिया था कि डेरा प्रेमियों ने कांगे्रस प्रत्याशी दूड़ाराम को समर्थन नहीं किया है। वैसे तो यहीं से डेरा प्रेमियों की एकजुटता में डेंट पडऩे शुरू हो गए थे। फतेहाबाद सीट का चुनाव परिणाम आने के बाद यह बात पूरी तरह से साफ हो गई कि डेरा प्रेमियों की एकजुटता अब पहले जैसी नहीं रही और डेरे के फरमान भी अब उनके लिए कोई खास मायने नहीं रखते। क्योंकि फतेहाबाद शहर के एक वार्ड को छोड़कर कांग्रेस
प्रत्याशी दूड़ाराम को अन्य सभी वार्डों में पराजय का सामना करना पड़ा। यहां यह उल्लेखनीय है कि शहर के हर वार्ड में डेरा प्रेमियों की अच्छी खासी तादाद है। फतेहाबाद सीट की भांति ही रतिया सीट पर भी डेरा प्रेमियों ने कांग्रेस प्रत्याशी जरनैल सिंह को खुले रूप से समर्थन दिया था, लेकिन यहां भी डेरा समर्थित कांग्रेस प्रत्याशी जरनैल सिंह को इनेलो प्रत्याशी ज्ञानचंद ओड के हाथों पराजित होना पड़ा। जबकि इनेलो के साथ डेरा प्रेमियों का 36 का आंकड़ा बताया जाता है। वहीं टोहाना में डेरा प्रेमी रोशन लाल चुनाव लड़ रहे थे और डेरा प्रेमियों ने कांग्रेस प्रत्याशी परमवीर सिंह का डटकर विरोध किया था। वहां कांग्रेस प्रत्याशी परमवीर सिंह आसानी से चुनाव जीत गए थे। फतेहाबाद जिले की इन तीन विधानसभा सीटों के चुनाव परिणाम को देखकर यह लगता है कि जिले में डेरा प्रेमियों की एकजुटता की कहानी का दी एंड हो गया है और आने वाले चुनाव में डेरा फैक्टर का महत्व भी जरूर काफी कम होगा। याद रहे इन चुनाव से पहले आम तौर पर यह समझा जाता था कि जिस उम्मीदवार के साथ डेरा प्रेमी जाएंगे, वह उम्मीदवार आसानी से चुनाव जीत जाएगा।
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