दिल्ली। प्रदेश में दौबारा सत्ता हासिल करने की उम्मीद से कांग्रेस हाई कमान फूंक-फूंककर कदम रख रही है और हर विधानसभा क्षेत्र से ऐसा चेहरा उतारने की फिराक में है जो उसे जीत का 'ताजÓ पहना सके। इसके लिए न केवल गहन मंथन किया जा रहा है, बल्कि क्षेत्र का राजनीतिक वातावरण देखकर टिकट के दावेदारों को तोलकर भी देखा जा रहा है कि पिछले विधानसभा चुनावों के बाद दावेदार का जनाधार बढ़ा है या नहीं। इसके साथ ही कांग्रेस एक नई रणनीति के तहत प्रदेश में लगातार तीन विधानसभा चुनावों में हार का सामना करने वाली लगभग एक दर्जन विधानसभा सीटों पर 'दांवÓ लगाकर राहुल गांधी की फौज में से युवा चेहरों को उतारने की फिराक में है। फिलहाल इस रणनीति के तहत युवा कांग्रेस की टीम ने अपना कार्य भी शुरू कर दिया है और हरियाणा यूथ कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष संजय छोक्कर ने कांग्रेस महासचिव एवं यूथ कांग्रेस प्रभारी राहुल गांधी को प्रदेश के युवा दावेदारों की सूची भी सौंप दी है। अब देखना यह है कि राहुल गांधी अपनी फौज के कितने सिपाहियों को चुनावी युद्ध का 'महारथीÓ बनाने का प्रयास करते हैं। भले ही राहुल गांधी ने लोकसभा चुनाव में प्रदेश में युवाओं को अधिक से अधिक चुनाव लड़कर आने की बात कही थी। इसी के तहत उन्होंने सिरसा लोकसभा क्षेत्र से अपने सैंन्य कंमाडर अशोक तंवर को उतारक युवाओं की भागीदारी राजनीति में बढ़ाने का प्रयास किया था। राहुल गांधी द्वारा मनोनीत अशोक तंवर का लोकसभा क्षेत्र की जनता ने भरपूर साथ दिया और उसे जीत का ताज पहनाकर संसद में भेजा। अब राहुल की सोच है कि विधानसभा में भी अधिक से अधिक युवाओं को टिकट दिलवाकर दोबारा कांग्रेस सरकार बनाना चाहते हैं। इसके लिए उन्होंने प्रदेश में 13 प्रतिशत युवाओं को देने की पेशकश पहले ही की थी। अब उनका विचार है कि प्रदेश के उन विधानसभा क्षेत्रों से युवा चेहरों को उतारा जाए, जहां पर कांग्रेस पिछले तीन विधानसभा चुनावों से हार का सामना कर रही है। प्रदेश में करीब एक दर्जन के आसपास ऐसे विधानसभा क्षेत्र हैं जहां से कांग्रेस लगातार पिछले तीन विधानसभा चुनावों में हारी है। इन विधानसभा क्षेत्रों में दो सिरसा व एक फतेहाबाद का विधानसभा क्षेत्र भी शामिल है, जहां से कांग्रेस लगातार तीन विधानसभा चुनावों से हार रही है। इनेलो के गढ़ डबवाली, ऐलनाबाद और रतिया ऐसे क्षेत्र हैं, जहां पिछले तीन विधानसभा चुनावों में कांग्रेस को जीत का स्वाद चखने का मौका नहीं मिला। वर्ष 1996 में हुए विधानसभा चुनाव में रतिया से हविपा के रामस्वरूप रामा, वर्ष 2000 के चुनाव में इनेलो के जरनैल सिंह व वर्ष 2005 में हुए विधानसभा चुनावों में इनेलो के ज्ञानचंद ओढ़ ने जीत हासिल की थी।कांग्रेस के पत्याशी को तीनों बार ही हार का सामना करना पड़ा। इसी प्रकार ऐलनाबाद में वर्ष 1996 में हुए विधानसभा चुनाव में एसएपी के भागीराम, 2000 के चुनाव में इनेलो के भागीराम व 2005 के विधानसभा चुनाव में भी इनेलो पार्टी से पूर्व संासद डा. सुशील इंदौरा ने जीत हासिल की थी। डबवाली से भी वर्ष १996 के विधानसभा चुनाव में मनीराम, वर्ष 2000 व 2005 के विधानसभा चुनाव में इनेलो के डा. सीताराम ने जीत दर्ज की थी। इस तरह के प्रदेश के 14 विधानसभा क्षेत्रों से राहुल ने अब युवा ब्रिगेड को मौका देने की बात कही है, जहां पार्टी लगातार हार रही है । उनका मानना है कि युवाओं में जोश और उत्साह है और इन क्षेत्रों की जनता भी पहले के उम्मीदवारों के बजाए ऐसे उम्मीदवार को टिकट देने की मांग कर रही है, जो जीत दर्ज कर हार की 'हैट्रिकÓ से छूटकारा दिला सके। कांग्रेस के महासचिव सांसद राहुल गांधी की यह सोच उस समय ओर भी महत्त्वपूर्ण मानी जा रही है, जब विधानसभा चुनावों के लिए प्रदेश में कोई गठबंधन नहीं है और इनेलो, हजकां, भाजपा व बसपा सहित सभी पार्टियां अकेले चुनाव लड़ रही है। ऐसे में प्रदेश के हर जिले में स्थापित कांग्रेस की मजबूत युवा ब्रिगेड हर किसी सीट पर जीत दर्ज करने का जज्बा रखती है। बहरहाल, यह देखने वाली बात है कि स्क्रीनिंग कमेटी व हाईकमान राहुल गांधी की सोच को कितना महत्त्व देती है और कितने स्थानों पर युवाओं को उस स्थिति में मौका देती है, जब टिकट पाने के लिए एक-एक विधानसभा क्षेत्र पर दर्जनों मजबूत दावेदार दिल्ली के गलियारों में टिकट पाने के लिए घमासान मचा रहे हैंं।
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